10258205_1029843573762178_7464802030065848918_o.jpg

1

फिसल गए

क्या खूब रफ़्तार थी तेरी ज़िन्दगी की,
साथ राहगीर छोर निकल गए।
अफसोस इस बात का नहीं , कि तुम आगे निकल गए ,
अफसोस इस बात का है, तुम दौरे नहीं , फिसल गए।

क्या खूब रफ़्तार थी तेरी ज़िन्दगी की

March 23, 2021, 11:59:47 AM

© drateendrajha.com

logo-new-png.png

Shayari

Read
42